सोनागाछी:- देश केे माथे पर कलंक

फारूक अब्‍बास। बेशक हिन्‍दुस्‍तान में देेह व्‍यापार के लिये कानून व्‍यवस्‍था हैं फिर भी देश केे कई हिस्‍सों में यह काम धडल्‍ले केे साथ चल रहा हैै। लाखों लडकियाॅॅ जबरदस्‍ती इस देह व्‍यापार में ध्‍ाकेल दी जाती हैं। सब खबर होतेे हुुऐ शासन मौन रहता हैै। अचम्‍भे की बात यह है कि यह काम चोरी छुपे नही बल्कि डंके की चोट पर होता है। और सरकार केे लिये खुली चुुनौती होता हैै। आज हम बात करेेंंगे देश में चल रहे ऐशिया के सबसे बडे रेेडलाइट ऐरिया सोनागाछी की जो कि कोलकाता में स्थित है। यहॉ 18 साल की कम उम्र की लडकिया केेवल 120 रूपये में बेच दी जाती हैं। कोलकाता में स्थित सोनागाछी एक स्‍लम ए‍ेेरिया है। जहॉ गरीबी बेहद ज्‍यादा है। जिससे मजबूर होकर घरवाले उन्‍हे जबरदस्‍ती इस धन्‍धेंं में उतार देेते हैं। सोनागाछी में आज 10 से 12 हजार लडकिया काम करती हैं। जिनकी कीमत 50 रूपये सेे श्‍ाुरू होकर कई हजारों में होती है। 

हैरत की बात यह है कि इस धन्‍धें में कमनें वाला ज्‍यादातर पैसा उनके मालिकों अौर दलालाें की जेबों में चला जाता है। और उन औरतो और लडकियों को मिलता हैै सिर्फ कुछ पैसा के साथ अपमान। पिंजडों की तरह बन्‍द इस कोठरियों में बन्‍द लडकियों को वो सब देखना पडता है जिसकी असल जीवन में हम कल्‍पना भी नही कर सकते। जिस उम्र में लडकियों को शर्म, लिहाज, तौर तरीकों जैसी चीजों को सिखाया जाता है उसी उम्र में यह लडकिया हवस के शिकार मर्दो के बिस्‍तर पर परोस दी जाती हैं। यहॉ रहनें बाले लडकों को पता होता हैै कि दूसरे कमरें में उनकी मॉ या बहन किसी और मर्द के साथ अपनें जिस्‍म का सौदा कर रही हैै। और वे बेबस बस शर्म से अपनी नजरें नीचे झुकाऐ रहते हैं। आज जब हिन्‍दुस्‍तान दुनिया केे और देशों के कदम से कदम मिला रहा हैै। आधुनिकता की दौड में आगे बढता जा रहा हैं। वहीं हिन्‍दुस्‍तान का यह छोटा सा हिस्‍सा आज भी सदियों पीछें हैं। राजा महाराजाओं केे जमानें में जो कुुरीतिया उत्‍पन्‍न हुई थी वो आज भी बरकरार हैै। कुुछ नही बदला न तो समाज के नियम और न ही लोगों की सोच। जिस प्रकार भारतीयों की संंस्‍क्रति है उस हिसाब से हमारें संस्‍क्रति पर यह बहुत बडा कलंक हैं। जिसकाेे धोने का प्रयास हम नही कर रहे हैं। इस व्‍यवस्‍था केे सबसे अधिक दोषी वो लोग खुद हैं जो इस परिवेश से बाहर आना ही नही चा‍हते। उनको अपना पेट भरनें के लिये कोई और काम दिखता ही नही। इसके दोषी वे लोग भी हैं जो इन गलियों में जाना पसन्‍द करते हैं। इसकी दोषी वो लोग और सरकार भी है सब कुछ जानते हुुये भी चुप्‍पी साधे हुई है। इस का दोषी हम सब हैं जिन्‍होनें इस परिवेश को जन्‍म दिया। अगर हम कुछ नही कर सकते तो बस इतना तो कर ही सकते हैं कि उन गलियों में न जाऐं और न किसी को जाने दें। अगर हर भारतीय यह सकंल्‍प करले तो देखते ही देखते सोनागाछी के लोग इस बुराई से बाहर आ जाऐंगे। लेकिन हम यह संकल्‍प क्‍यों ले। सारा काम ताेे सरकार का है। सरकार रोके लोगों को वहॉ जानें से। यही मानसिकता हमें इस देश को बदलने सेे रोक लेेती हैै। और हमारा देश सदियों से अपने माथे पर यह कलंक का बोझ ढोता आ रहा हैै और न जानें कब तक ढोता रहेगा। 

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